सभी चाहते हैं मेरा एक हिस्सा उनके लिये, में कब पाऊँ कुछ अपने लिये जीवन है मेरा, किंतु महत्व किसी और का विचार हैं मेरे, परंतु आचार किसी और सा तस्वीर बनाना चाहूँ तो मन के रंग न भर पाऊँ गीत गाना चाहूँ, तो अपनी धुन न रच पाऊँ कैद हूँ मैं, जैसे एक अदृश्य…Continue Reading “Uljhan”

छोटे छोटे टुकडों में बँटा हुआ है,ऐसा लगता है जैसे कटा हुआ है,लंबी लंबी ईमारतों के बीच में,एक मुट्ठी आसमान ही मिला हुआ है। ऊँची उडान भरते देखा नहीं,सदियों से किसी पंछी को,बस पार करते देखा है,एक छोर से दूसरे तक,अपने आसमान के टुकडे को। बादलों का काफिला भी,निकलता है थक थक के,मेरे टुकडे में…Continue Reading “एक मुट्ठी आसमान”

Jaane kyon man vichalit hai,Kyon vicharon ka ufan aata hai,Jab shant hai vatavaran saara,Toh kyon man mein tufan aata hai? Ek ladi si lag jaati hai khayaalon ki,Jinka na aapas mein naata hai,Samajhne ka karoon kitna bhi prayaas,Kintu samajh mein kuch na aata hai. Mrigtrishna si tadap hai ab,Yeh baat kyonki jaanti hoon,Who saare uttar…Continue Reading “Mrigtrishna”